Friday , 20 May 2022

सूर्य उपासना और आरोग्य सौभाग्य व सर्व सुख प्रदाता छठ व्रत आठ नवंबर से 11 नवंबर तक

वाराणसी। चार दिवसीय सूर्य उपासना और आरोग्य सौभाग्य व सर्व सुख प्रदाता छठ व्रत आठ नवंबर से 11 नवंबर तक मनाया जाएगा। व्रत का प्रथम नियम संयम आठ नवंबर सोमवार को व्रत का द्वितीय संयम नौ नवंबर मंगलवार को होगा। अस्ताचल सूर्य देव को प्रथम अर्घ्‍य 10 नवंबर गुरुवार को, सायं काल उगते हुए सूर्य देव को द्वितीय अर्घ्‍य 11 नवंबर गुरुवार को दिया जाएगा। प्रत्यक्ष देव भगवान सूर्य देव की आराधना से जीवन में उमंग उल्लास व ऊर्जा का संचार होता है। सुख समृद्धि खुशहाली के लिए सृष्टि के नियंता भगवान सूर्य देव की महिमा अनंत मानी गई है। सूर्य देव की महिमा में रखने वाला डाल छठ जिसे छठ पर्व भी कहते हैं। यह कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से प्रारंभ होगा। इसका समापन कार्तिक शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि के दिन होता है। ज्योतिषाचार्य विमल जैन के अनुसार इस बार चार दिवसीय लोक आस्था का महापर्व आठ नवंबर सोमवार से प्रारंभ होकर 11 नवंबर गुरुवार तक चलेगा। धार्मिक पौराणिक मान्यता यह है कि सूर्य षष्ठी के व्रत से पांडवों का अपना खोया हुआ राज्य पाठ एवं वैभव प्राप्त हुआ था। मान्यता यह भी है कि कार्तिक शुक्ल षष्ठी के सूर्यास्त तथा सप्तमी तिथि सूर्योदय के मध्य वेद माता गायत्री का प्रादुर्भाव हुआ था। ऐसी भी पौराणिक मान्यता है कि भगवान राम के वनवास से लौटने पर राम और सीता ने कार्तिक शुक्ल षष्ठी के अतीत के दिन उपवास रखकर भगवान सूर्य देव की आराधना कर तथा सप्‍तमी के दिन व्रत पूर्ण किया था। इस अनुष्ठान से प्रसन्न होकर भगवान सूर्यदेव ने उन्हें आशीर्वाद प्रदान किया था। फलस्वरुप सूर्य देव की आराधना का छठ पर्व मनाया जाता है। इस चार दिवसीय पर्व में भगवान सूर्य की आराधना का विधान है। ज्‍योतिषाचार्य विमल जैन के अनुसार सूर्य की आराधना का चार दिवसीय महापर्व आठ नवंबर से प्रारंभ होकर 11 नवंबर तक चलेगा।

पर्व का पुण्‍यकाल

कार्तिक शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि सात नवंबर रविवार को शाम 4:23 से आठ नवंबर सोमवार को दिन में 1:17 तक, आठ नवंबर सोमवार को व्रत का प्रथम नियम संयम।

कार्तिक शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि आठ नवंबर सोमवार को दिन में 1:17 से नौ नवंबर मंगलवार को दिन में 10:36 तक नौ नवंबर मंगलवार को द्वितीय संयम एक समय खरना।

कार्तिक शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि नौ नवंबर मंगलवार को दिन में 10:36 से 10 नवंबर बुधवार को प्रातः 8:26 तक 10 नवंबर बुधवार को व्रत के तृतीय संयम के अंतर्गत सायं काल अस्ताचल सूर्य देव को प्रथम अर्घ्‍य दिया जाएगा।

कार्तिक शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि 10 नवंबर बुधवार को 8:26 से 11 नवंबर गुरुवार को सुबह 6:50 तक रहेगा 11 नवंबर गुरुवार को 11 नवंबर गुरुवार को चतुर्थी एवं अंतिम संयम के अंतर्गत प्रातः काल उगते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देकर छठ व्रत का पारण किया जाएगा।

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